तीन तलाक बिल पर मोदी सरकार ने किए ये तीन बड़े बदलाव, पढ़ें

नई दिल्ली, (PNL) : आज लोकसभा में तीन तलाक बिल पर चर्चा हुई। केंद्र सरकार ने बिल में तीन संशोधन किए हैं, जिसके बाद बहस के लिए सरकार-विपक्ष में सहमति बन गई है। बीजेपी और कांग्रेस ने बिल पर चर्चा के वक्त अपने सदस्यों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है। वहीं इस मामले में कांग्रेस की तरफ से वरिष्‍ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकार को धार्मिक मामलों में नहीं पड़ना चाहिए।
सरकार और विपक्ष के बीच इस विधेयक पर पिछले सप्ताह सदन में चर्चा के लिए सहमति बनी थी। मोदी सरकार तीन तलाक बिल को पिछले साल लाई थी, बिल लोकसभा में चर्चा के बाद पास भी हो गया था, लेकिन कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों के विरोध के चलते वह बिल राज्यसभा में पास नहीं हो पाया था।
एक बार में ‘तलाक, तलाक, तलाक’ बोलकर तलाक देने पर रोक लगाने के लिए मोदी सरकार ने तीन महत्वपूर्ण संशोधन के साथ दूसरी बार ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2018’ लाई है। सरकार इस विधेयक को पिछले हफ्ते पास कराना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों द्वारा राफेल सौदे पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच समेत अन्य मांगों को लेकर हुए हंगामे के चलते बिल पर चर्चा नहीं हो सकी थी।
क्या हैं तीन बदलाव…
पहला संशोधन:
पहले का प्रावधान- इस मामले में पहले कोई भी केस दर्ज करा सकता था. इतना ही नहीं पुलिस संज्ञान लेकर मामला दर्ज कर सकती थी।
अब संशोधन के बाद- अब पीड़िता, सगे रिश्तेदार ही केस दर्ज करा सकेंगे।
दूसरा संशोधन:
पहले का प्रावधान-पहले गैर जमानती अपराध और संज्ञेय अपराध था। पुलिस बिना वॉरंट के गिरफ्तार कर सकती थी।
अब संशोधन के बाद- मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा।
तीसरा संशोधन:
पहले का प्रावधान- पहले समझौते का कोई प्रावधान नहीं था।
अब संशोधन के बाद-मजिस्ट्रेट के सामने पति-पत्नी में समझौते का विकल्प भी खुला रहेगा।
तीन तलाक पर अबतक…
– 16 महीने पहले आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला
– तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा को असंवैधानिक करार दिया था
– अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था
– सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कानून बनाने को कहा था
– सरकार ने लोकसभा से मुस्लिम महिला विधेयक पारित कराया
– लोकसभा में 28 दिसंबर 2017 को पास किया गया था
– विधेयक को केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पेश किया था
– 10 अगस्त 2018 को बिल राज्यसभा में पारित नहीं हो सका
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