तामिलनाडु में कब्र से निकला 433 करोड़ रुपए का खजाना, दंग रह गए अधिकारी

नई दिल्ली, (PNL) : कहते हैं जितना काला धन विदेशों में है. उससे भी कहीं ज़्यादा देश में है. जिसे निकालने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट वक्त वक्त पर छापे मारता रहता है. ये काला धन कभी घर से निकलता है. तो कभी दुकान से. कभी ज़मीन से. तो कभी छत से. कभी बिस्तर के नीचे से तो कभी बाथरूम या दीवार से. मगर इस बार तो हद ही हो गई. ख़ज़ाना ऐसी जगह छुपाया जहां सैकड़ों लोग सो रहे थे. मगर चूंकि वो बोल नहीं पाते, लिहाज़ा छुपाना आसान हो गया. देश के इतिहास में शायद पहली बार इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक अनोखी रेड मारी. ये छापा कब्रिस्तान में पड़ा. फिर छापे के दौरान जब एक कब्र खोदा गया तो उसमें से निकला 433 करोड़ रुपये का खज़ाना.
कब्र की कहानी, कब्रिस्तान का रहस्य
28 जनवरी 2019 का दिन. आयकर विभाग को ख़बर मिलती है कि तमिलनाडु के मशहूर सर्वणा स्टोर, लोटस ग्रुप और ज़ी स्कॉवयर के मालिकों ने हाल ही में कैश के जरिए चेन्नई में 180 करोड़ की प्रॉपर्टी खरीदी है. और वो इस डील को छुपाकर टैक्स की हेराफेरी कर रहे हैं. ये खबर इतनी पक्की थी कि आयकर विभाग ने इन कंपनियों के चेन्नई और कोयंबटूर में 72 ठिकानों पर छापा मारने के लिए कई टीमें तैयार कीं. और सुबह से ही आयकर विभाग की टीम इन कंपनियों के ठिकानों पर छापे मारने लगीं. मगर इनकम टैक्स के अधिकारियों के हाथ कुछ भी नहीं लगा. ना रुपये. ना ज़ेवर. ना पेपर.
6 फरवरी 2019, चेन्नई
आयकर विभाग को यकीन नहीं हो रहा था कि ये कैसे हुआ कि इन तीनों कंपनियों के मालिक के बारे में इतनी पुख़्ता जानकारी होने के बावजूद उनका ऑपरेशन फेल कैसे हो गया. उनके हाथ कुछ नहीं लगा. डिपार्टमेंट को अपनी इंफार्मेशन पर इतना यकीन था कि वो खुद को नाकाम मानने के बजाए इस बात की तफ्शीश में जुट गए कि उनकी ये रेड नाकामयाब कैसे रही. मुखबिरों को एक्टिव किया गया. शहर के सैकड़ों सीसीटीवी चेक किए गए. कॉल डिटेल खंगाली गईं. तब जाकर पता चला कि एक एसयूवी गाड़ी उस रोज़ यानी 28 जनवरी को पूरे दिन सड़कों पर बेवजह इधर-उधर घूम रही थी. जिसकी फुटेज देखकर डिपार्टमेंट को शक हुआ. सीसीटीवी की तलाश की गई मगर उसमें काफी वक्त लगा हालांकि अगले ही दिन पुलिस ने उस एसयूवी और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया.
7 फरवरी 2019, सुबह का वक़्त, चेन्नई
हर तरफ सन्नाटा. जैसा कि कब्रिस्तान में होता है. मगर इस सन्नाटे को चीरती सायरन की आवाज़. क्योंकि खबर मिलते ही आयकर विभाग की टीम सुबह सुबह चेन्नई के एक कब्रिस्तान में दाखिल हुई. उनके साथ उस एसयूवी का ड्राइवर भी था, जो 28 जनवरी को पूरे दिन अपनी गाड़ी को शहर में घुमा रहा था. गिरफ्तारी के बाद उससे रातभर कड़ी पूछताछ की गई थी. और इस वक्त भी वो कब्रिस्तान में आयकर विभाग के अधिकारियों के साथ आया था.
सैकड़ों कब्रों के बीच उस ड्राइवर ने एक कब्र की तरफ इशारा किया. उसके इशारा करते ही पूरा डिपार्टमेंट उस कब्र की तरफ दौड़ पड़ा. फावड़ा, कुदाल और बेलचा लेकर कर्मचारी जुट गए. आनन फानन में कब्र को खोदा गया. फिर जब कब्र की मिट्टी हटी और जो तस्वीर दिखी. उसने वहां खड़े आयकर के तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों के होश उड़ा दिए.
आयकर विभाद के अधिकारी, कर्मचारी और पुलिसवाले अब उस कब्र के सामने खड़े थे. जिसमें मुर्दा नहीं खज़ाना दफ्न था. पूरे 433 करोड़ का खज़ाना. इसमें करीब 25 करोड़ रुपये नकद, 12 किलो सोना और 626 कैरेट हीरे थे. मगर सवाल ये था कि आयकर अधिकारी जिस खज़ाने को ढूढने के लिए 72 ठिकानों पर छापे मार चुके थे. वो आखिर एक कब्र में कैसे आया. आयकर विभाग की रेड की खुफिया जानकारी किसने लीक की? तो इन सारे सवालों के जवाब उस ड्राइवर ने दिए जो पूरे दिन चेन्नई की सड़कों पर काला धन लेकर बस यूं ही घूम रहा था.
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