राफेल डील पर मोदी सरकार को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, पढ़ें क्या था पूरा मामला

नई दिल्ली, (PNL) : सुप्रीम कोर्ट से मोदी सरकार के लिए आज राहत भरी खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील की मांग की सभी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि राफेल की खरीददारी में सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और ये देश की जरूरत है। साथ ही देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि राफेल पर कोई संदेह नहीं है। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘जहाज की जरूरत और क्वालिटी पर कोई संदेह न हो तो उसकी कीमत पर जाने की कोई जरूरत नहीं है।
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि ‘इस प्रक्रिया को लेकर हम संतुष्ट हैं और संदेह की कोई वजह नहीं है। कोर्ट के लिए यह सही नहीं है कि वह एक अपीलीय प्राधिकारी बने और सभी पहलुओं की जांच करे।’ कोर्ट ने साफ किया कि ‘हमें कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे लगे कि कोई कॉमर्शल पक्षपात हुआ हो।’ CJI रंजन गोगोई ने कहा कि ऑफसेट पार्टनर के विकल्प में दखल देने की भी कोई वजह नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बातें…
– सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदा प्रक्रिया को लेकर दायर सभी याचिकाएं खारिज की
– सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि ऐसे मामले में न्यायिक समीक्षा का नियम तय नहीं है
– राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना गलत है
– कोर्ट ने फ़ैसले मे आफसेट पार्टनर चुनने पर कहा कि उसे किसी का फ़ेवर करने के सबूत नही मिले
– रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने में कमर्शियल फेवर के कोई सबूत नहीं।
– देश फाइटर एयरक्राफ्ट की तैयारियां में कमी को नहीं झेल सकता
– कीमत की समीक्षा करना कोर्ट का काम नहीं जबकि एयरक्राफ्ट की ज़रूरत को लेकर कोई संदेह नहीं
– कुछ लोगों की धारणा के आधार पर कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता। इसलिए सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से फ्रांस के साथ राफेल विमानों की खरीद के बहुचर्चित सौदे में कथित भ्रष्टाचार की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई थी। इससे पहले सीजेआई रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच ने 14 नवंबर को मैराथन सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। राफेल डील की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग को लेकर ऐडवोकेट एम. एल. शर्मा और विनीत ढांडा ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थी। बाद में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी ऐसी ही याचिका डाली। एक संयुक्त याचिका पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी व सीनियर ऐडवोकेट प्रशांत भूषण ने दाखिल की थी।
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