पंजाबी फिल्मों के अमिताभ बच्चन कहे जाने वाले सतीश कौल की हालत पर कैप्टन ने दिया हर संभव मदद देने का निर्देश, लुधियाना डीसी पहुंचे मिलने

लुधियाना, (PNL) : पंजाबी फिल्मों के अमिताभ बच्चन कहे जाने वाले सतीश कौल इन दिनों गुमनामी में बदहाल जिंदगी जी रहे हैं. करीब 300 से ज्यादा हिंदी और पंजाबी फिल्मों में काम कर चुके सतीश कौल की हालत इतनी खराब है कि ना तो उनके पास अपने खर्चे के लिए पैसे हैं और ना ही कोई घर.
एक हिंदी अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वो इन दिनों पंजाब में एक महिला के घर के एक कमरे में रहते हैं. वही उनके खाने से लेकर दवाओं तक का इंतजाम करती हैं. वो बताते हैं कि मैंने 30 साल तक फ़िल्मी जगत में काम किया. एक वक्त ऐसा था कि लोग मिलने के लिए इंतजार करते थे, लेकिन अब कोई पूछने वाला नहीं है.
उनकी इन खबरों के बाद पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट करके उन्हें हर संभव मदद देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद लुधियाना के डीसी प्रदीप कुमार आज कौल के घर पहुंचे और उनका हालचाल जाना। डीसी अपनी रिपोर्ट बनाकर सरकार को सौपेंगे, जिसके बाद सरकार उनकी बीमारी का खर्चा उठाएंगे।
अपने फ़िल्मी करियर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा जन्म 1954 को कश्मीर में हुआ. पिता मोहन लाल कौल मौसिकी (शायरी) करते थे. पिता के कहने पर 1969 में पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में एडमिशन लिया.
यहां से ग्रेजुएट हुआ और फ़िल्मी दुनिया में कदम रखा. उन्होंने बताया कि कॉलेज में जया बच्चन, डैनी और शत्रुघ्न सिन्हा उनके बैच मेट रहे. शादी हुई तो पत्नी के साथ वो अमेरिका चले गए. वो उन्हें घर जमाई बनाकर रखना चाहती थी. लेकिन उनका शौक और पैशन सिनेमा था, इसलिए उसे छोड़ दिया.
उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ी वैसे-वैसे फिल्में हाथ से निकलने लगी. फिर मैंने एक टीवी चैनल में एक्टिंग की क्लासें लेने लगा. इसी दौरान 2014 में बाथरूम में नहाते समय मैं गिरा और मेरा कूल्हा टूट गया. मुंबई के एक अस्पताल में इलाज के लिए गया तो जिंदगी की पूरी पूंजी इसी इलाज में खर्च हो गई. ढाई साल तक बेड पर पड़ा रहा.
गर्दिश में जिंदगी जी रहे कौल के बात करते ही आंखों में आंसू आ जाते हैं. उन्होंने बताया कि 2015 में प्रकाश सिंह बादल की सरकार के समय पंजाबी यूनिवर्सिटी से 11 हजार रुपये की पेंशन लग गई. लेकिन कुछ दिनों बाद रुक गई. इसके बाद लुधियाना आकर एक्टिंग स्कूल खोला, पर वह फ्लॉप हो गया. इसके बाद हालत और खराब हुई और मुझे वृद्ध आश्रम में रहना पड़ा. फिर वहां से एक चाहने वाली महिला पंजाब अपने घर ले आई और अब वही रह रहा हूं.
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