सज्जन कुमार को उम्रकैद नहीं फांसी की सजा होनी चाहिए : सुखबीर-मजीठिया

चंडीगढ़, (PNL) : 1984 सिख विरोधी दंगों के एक मामले में आज कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले पर अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया की प्रतिक्रिया सामने आई है। सुखबीर ने कहा कि सज्जन कुमार को लेकर अदालत ने सराहनीय फैसला सुनाया है, लेकिन सज्जन कुमार को कम से कम फांसी की सजा सुनानी चाहिए। मजीठिया ने कहा कि कांग्रेस के राज दौरान ही बेकसूर सिखों को मारा गया और उसका आरोपी सज्जन कुमार कब से खुले में घूम रहा था। करीब 34 साल बाद सिखों को इंसाफ मिला, मगर सज्जन को फांसी होनी चाहिए।
5 सिखों की हत्या के मामले में हुई सजा
1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे फैले थे। इस दौरान दिल्ली कैंट के राजनगर में पांच सिखों- केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुविंदर सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या हुई थी। इस मामले में केहर सिंह की विधवा और गुरप्रीत सिंह की मां जगदीश कौर ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित परिवार की शिकायत और न्यायमूर्ति जीटी नानावटी आयोग की सिफारिश के आधार पर सीबीआई ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ 2005 में एफआईआर दर्ज की थी। 13 जनवरी 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
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