अमृतसर में खुशियां मातम में बदली, शादी की पहली लोहड़ी मनाने से पहले युवक का कत्ल, दो महीने बाद जाना था ऑस्ट्रेलिया

अमृतसर, (PNL) : पंजाब के अमृतसर से बड़ी खबर है। सुल्तानविंड रोड स्थित तेज नगर चौक में रहने वाले मनजीत सिंह के घर बेटे कंवलजीत सिंह की पहली लोहड़ी का जश्न धरा का धरा ही रह गया। क्योंकि जिस बेटे की शादी की लोहड़ी थी, उसी का कार्यक्रम से पहले कत्ल कर दिया गया। मनजीत सिंह के बेटे कंवलजीत सिंह के दोस्त सिकंदर ने जब बचाव करना चाहा तो तो आरोपियों ने सिकंदर के सिर पर ईट मारकर उसे गंभीर रूप से जख्मी कर दिया। घटना के बारे में पता चलते ही चारों तरफ मातम और सन्नाटा छा गया।
वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी फरार हो गए। सिकंदर को गुरु तेग बहादुर अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। वहा उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। जबकि बी डिवीजन थाने की पुलिस ने कंवलजीत के शव को पोस्टमार्टम के लिए कब्जे में ले लिया है।
तेज नगर की गली नंबर 9 में रहने वाले मनजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे कंवलजीत सिंह की 9 महीने पहले शादी की थी। आज घर में बेटे की शादी की पहली लोहड़ी का आयोजन किया गया था। घर में काफी मेहमान आए हुए थे। 8.30 बजे के करीब कंवलजीत सिंह अपने दोस्त सिकंदर के साथ बाइक पर सवार होकर कुछ सामान लेने गया था। रास्ते में एक जगह पर काफी भीड़ लगी हुई थी। सिकंदर ने जब उन लोगों से रास्ता मागा तो वहा खड़े आरोपितों ने उनके बेटे कंवलजीत सिंह और सिकंदर के साथ बुरी तरह से मारपीट करनी शुरू कर दी।
एक आरोपी ने कंवलजीत सिंह के दिल पर चाकू से कई वार कर दिए। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी घटनास्थल से फरार हो गए। जब उन्हें घटना के बारे में पता चला तो वह सभी तुरंत वहा पर पहुंचे और उन्होंने बच्चों को अस्पताल में दाखिल करवाया। पता चला है कि कंवलजीत सिंह की रास्ते में ही मौत हो गई थी।
2 महीने बाद पत्नी संग जाना था ऑस्ट्रेलिया
मनजीत सिंह के परिवार में रविवार की रात जहा एक तरफ लोहड़ी मनाने का सिलसिला चल रहा था। बेटे की मौत की सूचना मिली थी परिवार में मातम छा गया। मनजीत सिंह ने बताया कि वह अपने बेटे कंवलजीत सिंह और उसकी नवविवाहित पत्नी 2 महीने बाद आस्ट्रेलिया भेज रहे थे। कंवलजीत पेशे से फोटोग्राफर था और उसकी पत्‍‌नी ने आइलेट्स कर रखा था। दंपती चाहते थे कि वह विदेश जाकर सेट हो जाए और परिवार की आर्थिक रूप से सहायता कर सके। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। परिवार ने कभी सोचा नहीं था कि छोटी उम्र में बेटा दुनिया से चला जाएगा और बहू विधवा हो जाएगी।
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