मध्यप्रदेश में कांग्रेस से नहीं, NOTA से हारी बीजेपी, पढ़ें ये रिपोर्ट

भोपाल, (PNL) : मध्यप्रदेश में 15 साल बाद बीजेपी ने सत्ता गंवा दी है. कांटे की लड़ाई में बीजेपी को 109 और कांग्रेस को 114 सीटें मिली हैं. बीजेपी ने हार स्वीकार कर ली है, लेकिन उसके नेता लगातार दावे कर रहे हैं कि 3 बार लगातार सत्ता में रहने के बाद केवल 5 सीटों से पीछे रह जाने का मतलब है कि बीजेपी को जनता ने एकदम से नहीं नकारा है.
कई सीटों पर मामूली अंतरों से बीजेपी को हार मिली है. इतने कम अंतर से हार को इस रूप में देखा जा रहा है कि अगर पार्टी ने बूथ मैनेजमेंट बेहतर किया होता तो तस्वीर दूसरी होती. सबसे बड़ी बात यह है कि कई सीटें ऐसी हैं जहां नोटा ने बीजेपी का खेल बिगाड़ दिया है. इन सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार को जीत मिली है, लेकिन जीत के अंतर से ज्यादा वोट नोटा को मिले हैं.
राज्य में बसपा को 2, एसपी को 1 और निर्दलीय को 4 सीटें मिली हैं. बता दें कि 230 सीट वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में बहुमत के लिए 116 सीटों की जरूरत होती है. सपा और बसपा ने कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा कर दी है.
कांग्रेस इस जादुई आंकड़े से 2 सीट दूर रह गई और उसे 114 सीट मिली. बीजेपी के लिए राहत की बात यह रही उसने 15 साल तक शासन करने के बाद भी कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी. राज्य में बीजेपी को जरूर सत्ता विरोध लहर का सामना करना पड़ा लेकिन जिस तरह से उसने कुछ सीटों पर टक्कर दी वह उसके लिए राहत देने वाली बात है.
नतीजों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच केवल 5 सीटों का अंतर रहा, लेकिन अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि नोटा ने कई सीटों पर नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभाई है. मध्य प्रदेश में कम से कम 11 सीटें ऐसी हैं जहां नोटा ने प्रत्याशियों का खेल बिगाड़ा है.
गुन्नौर
कांग्रेस के शिवदयाल बागारी इस सीट से 57,658 वोटों के साथ विधायक चुने गए हैं, जबकि 55,674 वोटों के साथ बीजेपी के राजेश वर्मा दूसरे नंबर पर रहे. यहां भी नोटा को मिले वोट हार-जीत के अंतर से ज्यादा है. 3,734 लोगों ने यहां नोटा पर भरोसा जताया, जबकि हार-जीत का अंतर केवल 1,984 वोट रहा.
राजपुर
कांग्रेस के बाला बच्चन को 85,513 वोट मिले. उन्होंने बीजेपी के अंतरसिंह देवीसिंह पटेल को 932 वोटों के अंतर से हराया. यहां नोटा को 2485 लोगों ने चुना.
राजनगर
यहां भी नोटा ने अपना असर दिखाया है. यहां से कांग्रेस विक्रम सिंह विधायक चुने गए. उन्हें 40,362 वोट मिले, जबकि दूसरे नंबर पर रहे बीजेपी के एरविंद पटेरिया को 39,630 वोट मिले. जीत का अंतर यहां केवल 732 वोट रहा, जबकि नोटा को 2,485 लोगों ने चुना.
नेपानगर
कांग्रेस की उम्मीदवार सुमित्रा देवी कासडेकर यहां से 85,320 वोट पाकर विजेता रहीं, जबकि बीजेपी की मंजू राजेंद्र दादू को 84,056 वोट मिले. इस सीट पर सुमित्रा और मंजू के बीच 1,264 वोटों का अंतर रहा और नोटा को 2,551 लोगों ने चुना.
सुवासरा
मध्य प्रदेश की सुवासरा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार डांग हरदीप सिंह को 93,169 वोट मिले. उन्होंने बीजेपी के राधेश्याम नंदलाल पाटीदार को 350 मतों के अंतर से हराया. यहां नोटा दबाने वालों की संख्या 2,976 रही.
मांधाता
यहां से कांग्रेस के नारायण पटेल को 71,228 वोट मिले. उन्होंने बीजेपी के नरेंद्र सिंह तोमर को 1,236 वोटों के अंतर से हराया. नोटा को इस विधानसभा सीट पर 1,575 वोट मिले.
जोबट
कांग्रेस की कलावती भूरिया 46,067 वोटों के साथ यहां से विधायक निर्वाचित हुई हैं और बीजेपी के माधोसिंह डाबर 44,022 वोटों के साथ यहां से दूसरे स्थान पर रहे. इस सीट पर हार-जीत 2,056 वोटों के अंतर से तय हुई. यहां पर 5139 लोगों ने नोटा दबाया.
ब्यावरा
यहां पर कांग्रेस के गोवर्धन सिंह ने बीजेपी के नारायण सिंह पंवार को 826 वोटों से हराया. वहीं नोटा पर 1481 लोगों ने बटन दबाया.
ग्वालियर(एस)
इस सीट पर कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने बीजेपी के नारायण सिंह कुशवाहा को 121 वोटों से हराया. वहीं यहां पर 1550 लोगों ने नोटा को चुना.
जबलपुर(एन)
इस सीट पर कांग्रेस के विनय सक्सेना ने बीजेपी के शरद जैन को 578 वोटों से हराया. वहीं 1209 लोगों ने नोटा को चुना.
बीजेपी के 4 मंत्री नोटा से हारे
मध्य प्रदेश में नोटा ने 22 सीटों पर चुनाव प्रभावित किया है और इसकी चपेट में बीजेपी के चार मंत्री भी आ गए. हालांकि बीजेपी और कांग्रेस को प्राप्त मतों में महज 1 फीसदी का अंतर रहा. वहीं 1.4 फीसदी यानी 5.4 लाख मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया. ग्वालियर दक्षिण सीट पर हार जीत का मार्जिन 121 वोट का रहा. इस सीट पर कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने बीजेपी के नारायण सिंह कुशवाहा को 121 वोटों से हराया जबकि यहां पर 1550 लोगों ने नोटा का बटन दबाया. वहीं दामोह में वित्त मंत्री जयंत मलैया महज 799 वोट से हार गए जबकि वहां पर 1299 वोटर्स ने नोटा दबाया. बुरहानपुर में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अर्चना चिटनिस 5120 वोटों से हार गईं जबकि 5,700 नोटा पर वोट पड़े.
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