मोदी ने दिया दिल्ली-हरियाणा को डबल गिफ्ट, KMP एक्सप्रेस-वे का किया उद्घाटन, देखें कैसा दिखता है

नई दिल्ली, (PNL) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कुंडली-मनेसर-पलवल एक्सप्रेसवे (KMP) का उद्घाटन किया. एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करने के साथ ही प्रधानमंत्री ने गुरुग्राम में रैली को भी संबोधित किया. इस एक्सप्रेस के उद्घाटन के साथ ही अब राजधानी दिल्ली को बाहर से आने वाले वाहनों से राहत मिलेगी. इस एक्सप्रेस-वे की मदद से राजधानी को प्रदूषण से राहत मिलेगी.
एक्सप्रेस-वे के अलावा प्रधानमंत्री ने श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया. PM मोदी ने यहां से ही बल्लभगढ़-मुजेसर मेट्रो की शुरुआत भी की. एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से अब दिल्ली में आने वाले करीब 40 फीसदी बड़े वाहन बाहर से ही दूसरे राज्य में जा सकेंगे. रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हरियाणा का मतलब हिम्मत होता है, यहां के युवा सीमा पर खड़े होकर देश के लिए लड़ते हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस एक्सप्रेस-वे पर 12 साल से काम चल रहा था, ये 8-9 साल पहले ही मिल जाना चाहिए था. लेकिन पहले की सरकार के तौर-तरीके ने एक्सप्रेस वे को पूरा नहीं होना दिया. इसका इस्तेमाल कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान होना था लेकिन पिछली सरकार काम अटकाती रहती थी. उन्होंने कहा कि जब एक्सप्रेस-वे की शुरुआत हुई तो बजट काफी कम था, लेकिन काम लटकने की वजह से दाम बढ़ता गया.
PM बोले कि दिल्ली के चारों तरफ 270 किमी. एक्सप्रेस-वे के जाल का काम पूरा हो गया है, साथ ही बल्लभगढ़ भी मेट्रो के नक्शे पर आ गया है. उन्होंने कहा कि अभी देश में रेलवे-हाइवे कॉरिडोर पर काम चल रहा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने जितनी सड़कें 7.5 साल में बनाए थे, उससे ज्यादा हमने 4 साल में बना दिए.
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब देश में बिना इंजन वाली ट्रेन बन रही है, ये मेक इन इंडिया के तहत बनी है. उन्होंने कहा कि अब पानी के रास्ते व्यापारिक काम पूरा हो रहा है. पिछली सरकार के चार साल में 59 गांव को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया था, लेकिन हमारी सरकार के चार साल में 1 लाख से अधिक गांव को जोड़ा गया है.
यह रूट खुलने के बाद दिल्ली में प्रदूषण घटने की संभावना है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में घुसने वाले ट्रकों को एक बाइपास रास्ता मिल जाएगा. इस एक्प्रेसवे का 53 किलोमीटर हिस्सा पहले से चालू है लेकिन सोमवार को पूरी सड़क का उद्घाटन होने के बाद कुल 136 किलोमीटर लंबे रूट पर ट्रैफिक शुरू हो जाएगा.
एक्सप्रेसवे पर सुविधाएं
केएमपी एक्सप्रेसवे को वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के नाम से भी जाना जाता है. इसे 2009 में ही पूरा होना था लेकिन कई अड़चनों के कारण काम में बाधा आती गई. जमीन अधिग्रहण को लेकर कई दिक्कतें सामने आईं. वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (ईएमपी) के साथ केएमपी एक्सप्रेसवे तकरीबन 50 हजार बड़ी गाड़ियों को दिल्ली में घुसने से रोकने में सक्षम होगा.
6 लेन के इस एक्सप्रेसवे पर पार्किंग की जगह, पेट्रोल स्टेशन, पुलिस थाने, एक ट्रॉमा सेंटर, हेलीपैड, जलपान गृह और मनोरंजन केंद्र होंगे. इस रूट पर 8 छोटे और 6 बड़े पुल होंगे. इसके साथ ही 4 रेलवे ब्रिज, 34 अंडरपास और 64 पैदल यात्री क्रॉसिंग की सुविधा होगी.
दिल्ली में घटेगा प्रदूषण
दिल्ली में बड़ी गाड़ियों के प्रवेश के कारण प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है. इसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट सहित एनजीटी भी कई हिदायतें जारी कर चुका है. केएमपी एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद दिल्ली में प्रदूषण स्तर नीचे जाने की संभावना है क्योंकि 50 हजार से ज्यादा बड़ी गाड़ियों को दिल्ली पारकर पड़ोस के राज्यों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
यह एक्सप्रेसवे दिल्ली होकर यूपी और राजस्थान जाने वाली गाड़ियों को एक बाइपास रूट देगा, खासकर बड़ी गाड़ियों को ज्यादा राहत मिलेगी क्योंकि दिल्ली में उन्हें ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है.
एक्सप्रेसवे का जाल
केएमपी एक्सप्रेसवे हरियाणा में पांच जगहों से होकर गुजरेगा. ये पांच जगह हैं- सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, मेवात और पलवल. इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे चार बड़े नेशनल हाइवे जुड़ते हैं-एनएच-1(दिल्ली-अंबाला-अमृतसर), एनएच-2 (दिल्ली-आगरा-वाराणसी-दनकुनी), एनएच-8 (दिल्ली-जयपुर-अहमदाबाद-मुंबई) और एनएच-10 (दिल्ली-हिसार-फजिल्का-भारत पाक सीमा). इसलिए यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत से लेकर मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के ट्रैफिक को कम करने में मदद करेगा.
कई डेडलाइन पार
136 किमी लंबे इस एक्सप्रेसवे का शिलान्यास 2005-06 में किया गया था लेकिन अधिग्रहण और उसमें मिलने वाले मुआवजे को लेकर निर्माण की कई डेडलाइन पार होती चली गई. साल 2009 में एक्सप्रेसवे की कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अपना काम रोक दिया लेकिन केंद्र सरकार के बीचबचाव के बाद 2016 में काम फिर शुरू हुआ. इसके साथ ही चार लेन के प्रस्तावित इस एक्सप्रेसवे को 6 लेन में परिवर्तित करने का फैसला लिया गया. 83 किमी लंबे रूट पर 1863 करोड़ रुपए खर्च हुए लेकिन इस पूरे एक्सप्रेसवे पर 6400 करोड़ रुपए की लागत आई है.
लगेंगे वे-इन-मोशन सेंसर्स
प्रोजेक्ट हेड दिनेश कुमार सिंह ने कहा, वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे अब ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जुड़ गया है जो दिल्ली के आसपास एक रिंग रोड की तरह काम करेगा. इस रूट के कारण प्रतिदिन हजारों गाड़ियां दिल्ली में घुसने से बचेंगी. इससे प्रदूषण तो घटेगा ही, ट्रैफिक जाम से भी निजात मिलेगी. देश में ऐसा पहली बार हो रहा कि इस एक्सप्रेव पर गाड़ियों का भार मापने के लिए वे-इन-मोशन सेंसर्स लगाए जा रहे हैं.
एनसीआर का नया प्रॉपर्टी हब
केएमपी और केजीपी (कुंडली-गाजियाबाद-पलवल) एक्सप्रेसवे के दोनों ओर हरियाणा सरकार 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्रों में पांच नए शहर बसाने की योजना बना रही है. प्रत्येक शहर लगभग 5 हजार हेक्टेयर में फैला होगा जिसमें औद्योगिक, आर्थिक और कॉमर्शियल कोरीडोर बनेंगे.
एक्सप्रेसवे की खास बातें
-2009 में इसे पूरा होना था लेकिन भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की अड़चनों के कारण इसमें देर होती चली गई.
-90 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है.
-कुल 83 किमी में 54 किमी फेंसिंग का काम पूरा हो गया है.
-70 प्रतिशत लाइटिंग का काम पूर्ण.
-5 आरओबी, 144 अंडरपास/पुल/पुलिया, 6 इंटरचेंज, 7 शौचालय, 14 में 9 फव्वारे का काम पूरा.
-7 टोल बूथ.
-पूरी तरह सिग्नल मुक्त सफर.
-कुल 12 मूर्तियों में 3 का काम पूरा.
-12 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार.
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