बाबा रामदेव का राहुल और मोदी पर हमला, बोले-ना मैं पप्पू हूं, ना मैं गप्पू हूं

नई दिल्ली, (PNL) : योग गुरू बाबा रामदेव ने सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि मदर डेयरी को हमसे घबराने की जरूरत है नहीं है। गाय को बढ़ावा देने के लिए डेरी को आगे बढ़ा रहे है। गाय का दूध उत्तम होता है। गाय को माता कहते है जबकि भैंस को आंटी भी नहीं कहते। यह सब कुछ दूध की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। वहीं एक सवाल के जवाब में बाबा रामदेव ने कहा कि मैं “ना ही मैं पप्पू हूं ना ही गप्पू हूँ”। उन्होंने कहा कि नो प्रॉफिट नो लॉस पर हमारा व्यवसाय चल रहा है। 11 हज़ार करोड़ रुपये को ट्रस्ट के रूप में खर्च कर चुका हूं। मैं बड़े वजीरों और बड़े अमीरों पर भरोसा नहीं करता हूँ।
वहीं एक अन्य सवाल की आपके (बाबा रामदेव) इतना सारा पैसा है उसका क्या करेंगे। इस पर रामदेव ने कहा कि पैसा अच्छा है ना बुरा कैसे इस्तेमाल करते उस पर निर्भर करता है। सत्ता का संपति का कैसे उपयोग किया जाय इस पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि भोगियों के पैसा हो जाता है तो वे रोगी हो जाता है योगियों के पास पैसा आता है तो दुनियां निरोगी हो जाता है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि योग करने वाला व्यक्ति अपने आप मे मस्त रहता है। मैं पूरी दुनियां को देखता हूं और पूरी दुनियां मुझमे दिखती है। माँ बिछड़ने के बाद जब मैं पहली बार माँ से मिला था तो उनका आँचल आंसू से भींग गए थे। उन्होंने कहा कि 2025 तक पतंजलि दुनिया का सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी के रूप में उभरेगी। बाबा रामदेव ने कहा कि मैं 4 वर्णों का काम करता हूँ इसलिए मेरी जाती कर्मो से है। ज्ञान बांटता हूँ इसलिए ब्राह्मण हूँ, अन्याय को खत्म करता हूं इसलिए क्षत्रिय हूं अभाव को खत्म करता हूँ इसलिए वैश्य हूं विषमता को खत्म करता हूं इसलिए शुद्र हूँ।
उन्होंने कहा कि पतंजलि को शेयर मार्केट में भी लेकर नहीं जाऊंगा क्योंकि मैं इसे माया में नहीं ले जाना चाहता। हमारे यहां सुबह 4 से 10 बजे का वर्किंग ऑवर है। दुनिया में सबसे पहले के वर्किंग ऑवर में काम करता हूं। मेरे पास घड़ी नहीं है लेकिन समय का बिल्कुल पाबंद हूं। उन्होंने कहा कि धर्म आपके जीवन का आचरण है, मैं भारत माता को अपनी मां की तरह मानता हूं। इसलिए मैं अपनी माँ को प्यार करता हूं। आखिर में बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि वह जाने से अपने भारत माता के लिए कृषि,उद्योग,स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में 1 लाख करोड़ रुपये की चैरिटी करना चाहते हैं।
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