अमृतसर हमले में विदेशी खालिस्तानियों का हो सकता है हाथ, मूसा का कोई लिंक नहीं : पुलिस

अमृतसर, (PNL) : निरंकारी भवन पर हुए हमले के पीछे जाकिर मूसा का हाथ नहीं है। पंजाब पुलिस ने इससे साफ इंकार कर दिया है। पुलिस का कहना है कि इस हमले का मूसा से कोई संबंध नहीं है। हमारी तरफ से पंजाब भर में नाकाबंदी कर दी गई है। हर आने-जाने वाले की चेकिंग की जा रही है। जल्दी ही ग्रेनेड फेंकने वालों को पकड़ लिया जाएगा।
विदेशी खालिस्तानियों का हाथ हो सकता है
अमृतसर में निरंकारी भवन में ग्रेनेड हमले के पीछे विदेश में बैठे खालिस्तानियों का हाथ हो सकता है। क्योंकि हाल ही में कुछ समय पहले आर्मी चीफ ने कहा था कि बाहरी ताकतें पंजाब में फिर से उग्रवाद को जिंदा करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने चेताया था कि जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं की गई तो बहुत देर हो जाएगी। साथ ही उन्होंने असम में भी उग्रवाद को पुनर्जीवित किए जाने की बात कही।
जानिए कितनी तबाही हो सकती थी….
निरंकारी भवन में ग्रेनेड हमला हुआ और तीन लोगों की जान चली गई। मरने वालों की संख्या बढ़ सकती थी, लेकिन बचाव हो गया। क्योंकि एक तो निरंकारी भवन था। दूसरा, रविवार का दिन। करीब 200 लोग सत्संग सुनने के लिए आए हुए थे। ऐसे में बड़ा हादसा हो सकता था।
40 साल पहले भी हुआ था निरंकारी भवन पर हमला
यह घटना ठीक वैसी ही है, जैसी कि पंजाब में उग्रवाद की शुरुआत के वक्त हुई थी। तब 13 अप्रैल 1978 को वैसाखी के दिन अमृतसर में निरंकारी भवन पर हमला किया गया था। इसके बाद अकाली कार्यकर्ताओं और निरंकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, इसमें 13 अकाली कार्यकर्ता मारे गए थे।
रोष दिवस में सिख धर्म प्रचार की संस्था के प्रमुख जरनैल सिंह भिंडरांवाले ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। कई पर्यवेक्षक इस घटना को पंजाब में चरमपंथ की शुरुआत के तौर पर देखते हैं। बता दें कि राजासांसी अमृतसर शहर से 12 किलोमीटर दूर है। यह हाई सिक्योरिटी जोन में आता है। इंटरनेशनल बॉर्डर से इसकी दूरी 20 किलोमीटर है। वहीं इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी राजासांसी में ही है।
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