दर्शकों को खूब पसंद आई आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘बधाई हो’, पढ़ें रिव्यू

नई दिल्ली, (PNL) : बॉलीवुड से ‘बधाई हो (Badhaai Ho)’ जैसी दिल-दिमाग से बनाई गई फिल्म की उम्मीद कम ही रहती है और फिल्म के ट्रेलर से लेकर इसके खत्म होने तक दिमाग में यही डर कौंधता रहा कि अच्छे-खासे विषय का कचूमर न निकाल दिया जाए. शांतनु श्रीवास्तव, अक्षत घिल्डियाल और ज्योति कपूर ने कहानी को शानदार ढंग से लिखा है तो अमित रविंद्रनाथ शर्मा ने उतनी ही खूबसूरती के साथ फिल्म को परदे पर उकेरा है. फिर आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) समेत पूरा परिवार ही परदे पर छाया रहता है, और फिल्म किसी एक एक्टर की नहीं बल्कि कहानी से लेकर हरेक कैरेक्टर की रहती है. ‘बधाई हो (Badhaai Ho)’ हर मोर्चे पर एंटरटेन करती है, और चेहरे पर मुस्कान लाने का कोई मौका नहीं छोड़ती है.
फिल्म की कहानी कौशिक परिवार की है. मिस्टर कौशिक (गजराज राव) रेलवे में टीटीई हैं और एकदम सरकारी अधिकारी है. मिसेज कौशिक भी हैं और उनके दो बेटे हैं. नकुल कौशिक (आयुष्मान खुराना) हैं. एक रात मौसम रंगीन होता है. मिस्टर कौशिक मिसेज कौशिक को बरसात पर कविता सुना रहे होते हैं और बाहर भी गरज के साथ बारिश हो रही होती है. इस सारे माहौल में मिस्टर कौशिक मिसेज कौशिक के साथ कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो समाज के मुताबिक उस उम्र में शोभा नहीं देता है.
नतीजे के रूप में सामने आता है, घर में आने वाला नया मेहमान. पूरे परिवार में हड़कंप मच जाता है. मिस्टर कौशिश की माताजी यानी दादी भी भूचाल ला देती है. कुल मिलाकर कमाल की सीन क्रिएट होता है. आयुष्मान खुराना की गर्लफ्रेंड सान्या मल्होत्रा भी चौंक जाती है. फिल्म पानी की तरह बहती है और मनोरंजन करती चली जाती है. कैरेक्टर इतने सॉलिड ढंग से तैयार किए गए हैं, मुंह से वाह निकल जाता है और थिएटर में ठहाके गूंजते रहते हैं. हालांकि आयुष्मान और सान्या मल्होत्रा का इश्क थोड़ा सा पकाता है लेकिन कौशिक परिवार सारी कमी को दूर कर देती है. फिर दिल्ली और मेरठ भी तो हावी रहता है.
‘बधाई हो (Badhaai Ho)’ ऐसी फिल्म है जिसमें हरेक एक्टर अपने बेमिसाल है. इस तरह की फिल्में बॉलीवुड में कम ही बनती हैं. फिल्म की कहानी स्टार है, एक्टर जान. आयुष्मान खुराना तो देसी लौंडे के किरदार में जमते ही हैं. ऐसे ही यहां पर भी है. सान्या मल्होत्रा भी ठीक है. लेकिन गजराज राव कमाल कर जाते हैं. रेलवे के टीटीई के किरदार की जो बारिकियां उन्होंने निभाई हैं, उस तरह का कैरेक्टर लंबे समय बाद स्क्रीन पर देखने को मिला है. नीना गुप्ता भी माशाअल्लाह हैं. उनके एक्सप्रेशंस ऐसे हैं कि छा जाती हैं. लेकिन सुरेखा सीकरी ने जो दादी का किरदार निभाया है, वह दादी फिल्म देखने के बाद लंबे समय तक जेहन में छाई रहती है. दादी कमाल है और उसके बोलने का अंदाज तो वाह.
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